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New Love Shayari by loveshayari2021.in


New Love Shayari 

Love shayari,Love shayari in hindi
Love Shayari 2020-2021

न खेल दिल से मेरे न जज़्बातों से
बहुत बुरी तरह टूटा है ये दिल
अब डर लगता है इश्क़ की बातों से...

तकदीर ने चाहा जैसे ढल गये हम,
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गये हम।

किसी ने विश्वास तोड़ा किसी ने दिल,
और लोगों को लगता है की बदल गये हम।

आज भी चाँद को देखकर
मुझे अक्सर तेरी याद आती है,
ख्वाब में अब भी'तेरा चेहरा और
आईने में 'तेरी सुरत नजर आती है।

*जो बीत गया सो बीत गयाआने वाला सुनहरा कल है वो…..*
*मैं कैसे भुला दूँ दिल से उसेमेरी हर मुश्किल का हल है वो*

बचाओ लाख .....दिल को .....मोहब्बत.... हो
          ही ....जाती है .....!!
          नज़र .....आखिर ....नज़र है ......ये शरारत ...
          हो ही ....जाती है ......!!

जिंदगी के मायने तुझसे है...*

*ज़िंदगी की ख्वाशें तुझसे है..*

*तू क्या जाने तू क्या है मेरे लिए...*

*मेरी हर साँस का वजूद तुझसे है

"हर प्यार में एक एहसास होता है, 
हर काम का एक अंदाज होता है, 
जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर, 
हर किसी को अपनी पसंद पे नाज़ होता है."

देखा है हमने भी आज़मा कर,
दे जाते है धोखा लोग करीब आकर,
कहती है दुनिया मगर दिल नही मानता,
क्या आप भी भुल जाओगे हमें अपना बना कर?

" क्या गिला करें उन बातों से ;
 क्या शिक़वा करें उन रातों से   ;
  कहें भला किसकी खता इसे हम ;
  कोई खेल गया फिर से जज़बातों से ।

*हमने लाख समझाया कि यूं ना मिलो गैरों से,,*
*वो हंस के कहने लगे तुम भी तो पहले गैर थे.!!*

*लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब.....!!*

*किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा.....!!*

सच्ची मोहब्बत में बिछड़ने के बाद
.
.
एक वो है जो रोज़ मेरी लंबी उमर
और सलामती की दुआ मांगता है,

एक मै हूं जो उससे बिछड़कर
रोज़ मौत का इंतजार करता हूं

सुनो अब लौट कर मत आना,
ये तन्हाई अब  हमें तुमसे भी प्यारी लगती हैं।

नफ़रत हो जाएगी तुझे ख़ुद से....
अगर मैं तुझसे तेरे ही अंदाज में बात करूं.....!!

1.आहिस्ता से दाखिल हो कर उसने दिल में हमारे..!
                          💓💓💓💓
हमारे ही दिल से हमें............बेदखल कर दिया..!!
2. नज़र अंदाज़ करते हो तो, लो हट जाते है नज़रों से!

इन्हीं नज़रों से ढूँढोगे, नजर जब हम नहीं आएंगे !
3. और क्या देखने को बाक़ी है ....

आप से दिल लगा के देख लिया ....
4. कोसने वालों ने कोसा है मिज़ाज-ए-हुस्न को

लूटने वालों ने लुटे हैं मुहब्बत के मज़े !!!
5 .तू बेश क़ीमती मोती है मेरे दिल की गहराइयों में !

तू हर पल संग होता है मेरे दिल की तन्हाइयों मे
6. कहीं यादों का मुकाबला हो तो बताना .

मेरे पास भी किसी की यादें बेहिसाब होती जा रही हैं..😊
7.तुम हाथों को बेकार की जहमत से बचा लो,

दस्तक का जवाब आता नहीं खाली मकान से..!!
8.वस्ल में फ़स्ल न बाक़ी रहे ऐ जान-ए-जहाँ

जैसे पहलू में है दिल यूँ मेंरे आग़ोश में आ
9.किसी के ज़ुल्फ़ ने बरहम किए हैं होश-ओ-हवास

लुटा है शाम के रस्ते में क़ाफ़िला दिल का
10. कभी "जो खवाब था, वो पा लिया? _

   मगर जो "खो "गई , वो क्या "चीज़ थी!
11. मसीहा दर्द के हमदर्द हो जायें तो क्या होगा ?

रवादारी के ज़ज्बे सर्द हो जायें तो क्या होगा ?
12. देखा जो इश्क आँखों में तो कहने लगा हकीम..!!

अफसोस की तुम अब
इलाज के काबिल ही नहीं रहे....!!
13. अक्स-ए-ख़ुशबू बना दिया तेरी चाहत ने मुझे,  

इत्र सी महक रही हैं सांसे तेरे खयाल भर से ही...!!!
14. फिर से महसूस हुई तुम्हारी कमी शिद्दत से...
💕 💕
आज फिर दिल को मनाने में हमें बड़ी देर लगी...💕💕

अजीब शर्त रख दी दिलरुबा ने मिलने की...

सूखे पत्तों पर चल कर आना और आवाज़ भी न हो..

सबने मशहूर किया, मुझको मोहब्बत है तुमसे

मुझको अच्छे लगे, इल्ज़ाम लगाने वाले

ग़र तेरी ख़ामोशियों में समन्दर का जोश है,
पर मेरे मुल्क का तो हर बच्चा सरफरोश है।

ख़ुशियों में झूम रहा हूँ तो यह मत समझना,
कि आज मदहोशी में यह फ़क़ीरा बेहोश है।

काल है यह कोरोना या कोई महाकाल है,
लगता है जैसे ख़ुदा का रचा महाजाल है।

संसार में आज घबराने की ज़रूरत नहीं,
"फ़क़ीरा" आज यहाँ हर कोई बेहाल है।

तेरी मेरी यारी,
सब पर थी भारी||
तू साथ मेरे,
 जब होती थी ||
एक अलग ही,
साहस में जीती थी ||
जैसे जग से मैं,
लड़ जाऊँगी ||
दुनिया बाल न बांका,
मेरा कर पायेगी ||
होते थे जब साथ साथ,
मस्ती बहुत करती थी ||
छीन सारी चॉकलेट,
मैं तेरी खाती थी||
आती है याद अब भी,
वो वक़्त क्यों नहीं आता अब ||

बहते पानी की तरह है,
चाहत तुम्हारी ...

रुकती नही,
थमती नही,
थकती नही...
और मिलती भी तो नही !!!


न वख्त है ना कोई ऐसा विचार....
न तुम्हारे पास जाना है  ...
न बुलाने का कोई इरादा ....
ना प्यार ही बाकी है ...
ना कोई प्यार का वादा ...
फीकी सी बस कुछ याद है...
और रोया सा अधूरा मन !!

दु:ख देकर भी सवाल करते हो
तुम भी क्या कमाल करते हो

गलती उसके यार की नही ,
जो उसके साथ है अभी।
गलती तो उसकी है जिसने
बाबु मुझे कहा और,
थाना किसी और को खिला रही है,

मोहब्बत छोड़ दी हमनें।
ये मेरा रोज रोज mood off होना ।
अच्छा नही लगता दोस्तो को मेरे😌

मैं क्या महोब्बत करूं किसी से,
मैं तो गरीब हूँ

लोग अक्सर बिकते हैं,
और खरीदना मेरे बस में नहीं

मोहब्बत भी हमने कुछ अजीब ढंग से की,

दौर जिस्मों का था और हम दिल मांग बैठे।

इश्क इश्क कहके ,
जिस्म से खेल गए।

जब बात आई,
रूह मिलान की,

तब, तू बजारू है ,
यह कह के निकल गए,

हाय रे इश्क कितनो की जान लेगा🥺
क्या कहा,
इश्क तू खुद अधूरा है।😟

इश्क जब तू खुद अधूरा है।
तो मेरा प्यार कैसे पूरा कर पायेगा,

गलतियाँ वो हमको गिनाने लगे है,
अभी तो मोहब्बत शुरु भी नही हुई और
नखरे दिखाने लगे है,
जिसकी खातिर हम खुद की नज़रे झुका रहे थे,
अब वो ही आँख दिखाने लगे हैं !!

कीसी का साथ होना भी
कभी कभी साथ नही लगता.....
अजीब है ना हाथ मे सब कुछ है
मगर हाथ कुछ नही लगता......

फूल फेंका पर मुझे पत्थर लगा,
आज पहली बार मुझे डर लगा।।

बरसों से रहते आया आज मुझे,
गांव से माँ को लाया तो घर लगा।।

देखा छत पे कबूतर  उड़ाते हुए,
वो हसीन,कातिल, दिलवर लगा।।

पीसा गया हूँ मैं बहुत तब जाकर,
तेरी  आँखो में यूँ ये काजर लगा।।

सर-ए-बाजार बेपरदा हीरोइने ये,
मजबूर तवायफ से हमें बद्दतर लगा।।

चंद पैसे कमाने की खातिर मेरा,
दांव पे अब तो गांव, घर,मग़र,लगा।।

गजलें कहना आसान नही केवल,
इनमें काफिया,रदीफ़,बहर, लगा।।

परिंदो को उड़ जाने तो दे इंसान,
काट रखे तूने फिर से वो पर लगा।।

कारण उनको तो कुछ पता ही नही,
दंगो में  जिनके  हाथ पत्थर  लगा।।

दूरियां नजदीकियों में तब्दील हों रब,
न फैसले में देरी नही उमर लगा ।।

"केवल" मौजूद हम रौशनी के लिए,
दिल के अंधेरे में उसे न खबर  लगा।।

काश हम दोनों एक साँस की डोरी में बंधे होते

हम डोरी को तोड़ कर जाए तो
हम भी ना रहे और तुम भी ना रहो

और तुम तोड़ कर जाओ तो
तुम भी ना रहो और मैं भी ना रहूं

मै तो रोज आता हूँ मुस्कराता हुआ घर ....

लेकिन वो कौन है जो आईने में उदास  दिखता है

क्या कहूँ किन हालातों से गुज़रा हूँ,,,,,,
खुद को बदलने के लिए,,,,,,
मग़र जब ये हालात बदले,,,,,,
तो वो वक्त भी गुज़रता चला गया,,,,,,

यह तो सोचा तुमने की तुम्हारे पीछे पड़े थे हम,
पर,
ये नहीं जाना की खुद से आगे माना हुआ था तुम्हें...

जब नेह नयन के दर्पण में।
जब पावन पुण्य समर्पण में।।
जब मात-पिता का वंदन हो।
जब गुरुवर का अभिनन्दन हो।।
जब राम बसे हों कण कण में।
जब श्याम बसे हों तन-मन में।।
जब सूरज चाँद सितारों में।
जब धरा गगन आभारों में।।
जब पर्वत सागर तरुवर में।
जब पावन सकल चराचर में।
जब यार सखा में दुश्मन में।
जब प्रिय प्रियवर में, परिजन में।।
हम नेह जताया करते हैं।
हम प्रीत जगाया करते हैं।।
तब कृपा प्रभू की मिलती है।
तब कली नेह की खिलती है।।
तब प्रियवर मैं आ जाता हूँ।
तब नमन भोर का गाता हूँ।।

ओ इश्क तेरी यादों से,
रब तक जमीं पे आ जाये..💓
और...
तेरे इन सुर्ख गालों पे....
गुलाब भी शर्मा जाये.....

छोड़कर तुझको हम तेरी सौत से दोस्ती कर ले......

इतना ना घुमा जिन्दगी की मौत से दोस्ती कर ले....

जलजला  तूफ़ान  कहुँ
इंसान   का  गुमान  कहुँ
मिट  गया  वज़ूद जिससे
उसे इन्सान का ज्ञान कहुँ

"तुझसे  मिलने  की  प्यास बाकी है
अब   भी   मेरी   तलाश   बाकी है

बहुत कुछ पा लिया है किंतु सनम
कोई   इक  चीज  खास  बाकी  है

मेरे     दीवानगी  भरे   दिल   का
तेरे    दिल  मे   प्रवास   बाकी  है

तेरी    दूरी   ने   जो   बनाई   थी
मुझमे अब भी वो त्रास  बाकी  है

 मेरी   नाकामयाबी    कहती   है
थोड़ा  अब भी  प्रयास  बाकी  है

खोज  यह  खत्म एक दिन होगी
थक  गया  हूँ  पर  आस  बाकी है

ये  अभी  मेरी  कल्पना  है   बस
उसका  भी  तो  कयास बाकी है

बाथम  पर्दे  मे   रह  नही  सकता
सीने  में  ये   विश्वास  बाकी   है"

इश्क़ की दुनिया है साहिब
        यहाँ कुछ भी हो सकता है
 दिल मिल भी सकता है
        और खो भी सकता है!!

जिसे तुम चाहते हो
        किसी और का भी हो सकता है
 तुम समझो इबादत
        वो गुनाह भी हो सकता है!!
अपना समझो जिसे~~
        वो सपना भी हो सकता है.....

अपनी तबियत के हालात हमसे बताये ना गए ।
वो आये ही इतनी जल्दी में कि जख्म दिखाए ना गए ।।

और दस्तक भी दी उसने तो उस चौखट पर जाकर ।।
जहाँ बुझे हुए दिए फिर से जलाये ना गए ।।

प्रकृति......

रूपक भी क्यों ना करे तुमसे प्यार
तुम ही तो हो इस जग में सबसे सुंदर।

तुमसे तो ही है सारा जग इतना प्यारा
तुम्हारे लिए तो है इस जग में सभी प्यारा।

एक रंग नहीं सभी रंग तो है तुझमें ही समाया
तुम्हारे खुशबू से ही है ये सारा जग महकाया।

तुम्हारी बाहों में आकर हर कोई हर गम भूल जाता है
तुम्हारी सुंदरता तो सबको अपने पास खींच लाता है।

तुम्हारे साथ जिंदगी जीने में अलग ही अनुभूति होता है
तुम्हारी दुनिया  माया की दुनिया से अलग ही रहता है।

तुमसे ही तो इस जग में हर कोई जुड़ा हुए है
रूपक तुम्हारी सुंदरता पहचान कर धन्य हुआ है।

पत्थर का लफ़्ज़ हो या कोई लफ़्ज़ का पत्थर हो,
ख़ुदा से एक ही इल्तजा है माँ ना कोई दर-ब-दर हो।

उनके सारे दुःख दर्द मुझको दे कर ही तू ख़ुश हो ले,
फ़क़ीरा के जीते जी माँ ना कोई इस तरह अब्तर हो।

अब ये राह हमनें जरा,हटके चुनी है।
तेरी तरफ जाती जो डटके चुनी है।।

तुमको देखा और इन आँखों ने तुम्हें ही।
देर नही की केवल एक झटके चुनी है।।

पीने की नई-नई लत अब देखो हमारी।
होठों से तेरे ही हमने तो सटके चुनी है।।

ख्वाहिश तुझे पाने की जो अब हमारी।
पतंग की तरह यूँ हमने कटके चुनी है।।

सिलसिले तेरी चाहत के सुनो हमसे केवल।
किस्से तमाम इश्क के ही रटके चुनी है।।

आ न पायें वो अबतक,
जिसका मैं इंतजार किये बैठी हूँ,
हर कोई आता है दरवाजे पर रोज,
पर वो नहीं आते जिनकी, 
दस्तक का मैं इंतजार किये बैठी हूँ ||

आज के इन्सान के कैसे है संस्कार देखो,
ख़ुद ही ख़ुद को कर रहा है मिस्मार देखो।

जिसने जनम दे पालपोस कर बड़ा किया,
बेटा माँ बाप को कर रहा है लाचार देखो।

बहु को बेटी समझ कर जो लायी थी घर,
माँ बाप पर करवाती है अत्याचार देखो।

कैसी है तेरी ख़ुदाई, कैसा है तेरा इंसाफ,
कर रहा बेघर माँ बाप को गुनाहगार देखो।

यह कैसी इन्सानियत कैसे है यह संस्कार,
फ़क़ीरा बूढ़े माँ बाप के गीले अब्सार देखो।

साथ तेरा अगर नहीं मिलता,
गांव में आज घर नही मिलता।।

सोच तुमने लिया तभी वरना,
छांव देता शजर नही मिलता ।।

शहर में सुख तलाश कर देखा,
सुख सुना है इधर नही मिलता ।।

शहर से बस यही शिकायत है
कोई दिल से बशर नहीं मिलता।।

खून बहता गया पसीना बन,
यूँ खुशी का नगर नही मिलता ।।

गाँव छोड़ा था बस इसी खातिर
काम सबको उधर नही मिलता ।।

।।कुछ तो बात है।।
शायद कुछ बदले बदले से मिजाज लगते हैं
आजकल तुम्हारे ,,
कुछ तो बात है युही नही आजकल तुम खफा
होकर हमारी बातो को इग्नोर कर देते हो ,,,,

हालांकि

किस्मत में साथ ना था सो मुझे छोड़ गया वो ।
सफर साथ का ना था सो रुख़ मोड़ गया वो ।।

हालांकि मोहब्बत तो बहुत की थी इक दूजे से हमने ।
हमसे ज्यादा चाहने वाला मिला सो नाता तोड़ गया वो ।।

जाके सुना दे कोई ये ऐलान पत्थरों से मिनारो से
आज निकला है शैलाब मखमली किनारों से

वर्षो से बंद थी गुमनाम थी चिड़िया आसमानों की
उसने परो को लड़ाया है लोहे की दीवारों से

तेरे जोर जुल्म सितम सब फिके पड़ जायेंगे
अब जाके तु टकराया है हौसलों के गुब्बारों से

बुरे हालात ने रोका है पर मै चुका नहीं हूं
ये बात कोई बता दे मेरे निगारो  से

आज अंधेरा है कल फिर सूरज निकलेगा
दिल ना हारे कह दे इन नज़ारों से

उसने नफरत की जमीं पे कुछ उगाया है समन्दर
कोई दरिया नहीं बनता मजधारो से

क्या लिखूं...
जो जन्नत है अनगिनत सितारों की,
उस आसमान पर क्या लिखूं...💓
और अपने चाँद के साथ नजर आये,
उस चाँद पर क्या लिखूं..💘

झूठा आरोप
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           वर्षा सोनी
कब तक लगाओगे झूठा आरोप मुझ पर?
और कितना मुझे तोड़ोगे सब मिलकर?
सुनो मैं वर्षा हूँ जो टूट कर बरसे अगर,
तो सारा शहर डूब जायेगा तेरा ||
मत तक मुझ पर इतना जुल्म,
अगर रूठ गई तो शहर तेरा सूखा पड़ जायेगा ||

खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी..
हवाएँ ख़ुद गुनगुनाएगी नाम तुम्हारा..!!

मैं रातों को भी जागा हूँ ,
शहर के हर कौने में भागा हूँ !
बुनते है सपने जिससे ,
हाँ मैं वही धागा हूँ ॥

बात सिर्फ एहसास की है..!
बिन छुए भी बहुत बार महसूस किया है
मैने तुम्हें..।

ताउम्र की सारी ग़ज़लें इक इंसान पे वारेंगे,

बूढ़े होकर धीमें लहजे में तेरा नाम पुकारेंगे!

मासूम मोहब्बत का बस इतना सा फसाना है...
कागज की कश्ती है,और बारिश का जमाना है।

रात भर जिस्म का हर हिस्सा दर्द करता है मेरा,
सुबह घर (देश) की जिम्मेदरियां फिर से जगा देती हैं मुझे..!!

तेरी तरफ आते हुए...
खुद से दूर जाते हुए...
दर दर ठोकर खाते हुए...
दिखेंगे हमेशा मुस्कुराते हुए...!!

काश बिन कहे मेरे दिल की बात,
तुम्हारा दिल समझ जाता
तुम मेरी हो जाती और मैं तुम्हारा हो जाता।

ना जाने क्या मासूमियत है
तेरे चेहरे पर....
तेरे सामने आने से ज्यादा,
तुझे छुपकर देखना अच्छा लगता है!!!

ो मेहंदी लगे हाथ दिखा के रोई।
मैं किसी और की हूँ वो ये बता के रोई।।

मैं बोला कौन है वो खुशनसीब।
वो मेहंदी से लिखा हुआ नाम दिखा के रोई।।

कहीं ग़म से फट ना जाये जिगर मेरा।
वो हँसते हँसते मुझे हँसा के रोई।।

दिल ना टूटे उसका ग़म-ए-इजहार में।
मैं भी रोया वो भी आँख से आँख मिला के रोई।।

उसने जाना जब मेरे रोने का सबब।
अपने आँसू मेरी हथेली पे सजा के रोई।।

जब भी देखा उसे हँसते हुए देखा।
वक़्त-ए-हिना हर खुशी को वो भूला के रोई।।

दिल ने चाहा उसे जी भर के देख लूँ।
वो मेरी आँखों की प्यास को बुझा के रोई।।

कभी कहती थी कि मैं नहीं जी पाऊँगी तुम बिन।
और आज फिर वो ये बात बार बार दोहरा के रोई।।

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